सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: Stray Dogs to Be Removed from Schools & Hospitals

🐾 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: Stray Dogs to Be Removed from Schools & Hospitals 


भारत में लगातार बढ़ रही कुत्तों के काटने की घटनाओं और रैबीज से होने वाली मौतों ने एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया है कि देशभर के स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंड, डिपो और रेलवे स्टेशनों से सभी आवारा कुत्तों को तुरंत हटाया जाए और उन्हें सुरक्षित शेल्टरों में स्थानांतरित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था, ताकि संस्थानों के परिसर को सुरक्षित रखा जा सके। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि सभी कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी (vaccination and sterilisation) “Animal Birth Control (ABC) Rules 2023” के तहत किया जाए।

यह आदेश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए बाध्यकारी है, और मुख्य सचिवों को आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को भी मजबूत करेगा, ताकि देश के सार्वजनिक स्थान फिर से सुरक्षित और स्वच्छ बन सकें।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते डॉग बाइट्स (Dog Bites) के मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि यह समस्या अब केवल पशु नियंत्रण का विषय नहीं रही, बल्कि यह मानव जीवन की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ गंभीर मुद्दा बन चुकी है।

अदालत ने कहा कि जब नागरिक अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, मरीज अस्पतालों में इलाज के लिए आते हैं, या लोग सार्वजनिक स्थलों जैसे बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स या रेलवे स्टेशन पर जाते हैं, तो उन्हें डर और खतरे के माहौल में नहीं रहना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह सरकारों और स्थानीय प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे हर नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा सुनिश्चित करें।

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अब वक्त आ गया है जब इस मुद्दे को केवल दया या बहस के नजरिए से नहीं, बल्कि “जनसुरक्षा के अधिकार” के रूप में देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित प्राधिकरण अपने दायित्वों को पूरा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

पीठ ने हाल के कई घटनाओं का उल्लेख किया —

  • बेंगलुरु में एक विदेशी उद्यमी को दौड़ के दौरान कुत्ते ने काटा,

  • दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में केन्या और जापान के दो कोच को काटने की घटना,

  • केरल के कन्नूर रेलवे स्टेशन पर एक रैबीज संक्रमित कुत्ते ने 18 लोगों को काटा।

🚫 आदेश का मुख्य बिंदु:

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि देशभर के सभी नगर निगम और स्थानीय निकाय यह सुनिश्चित करें कि शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड, डिपो और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों में कोई भी आवारा कुत्ता (Stray Dog) न रहे। अदालत ने कहा कि ऐसे सभी कुत्तों को तुरंत पकड़कर निर्दिष्ट पशु शेल्टर (Animal Shelter) में भेजा जाए, जहाँ उनका स्टरलाइजेशन (Sterilization) और टीकाकरण (Vaccination) किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का संक्रमण या खतरा न रहे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सख्ती से कहा कि इन कुत्तों को दोबारा उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था। ऐसा करने से अदालत के आदेशों का उद्देश्य — यानी सार्वजनिक स्थलों को सुरक्षित और कुत्तामुक्त बनाना — पूरा नहीं हो पाएगा।

यह आदेश नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, ताकि बढ़ती डॉग बाइट की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और शिक्षा, स्वास्थ्य व खेल जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनी रहे।

🐶 पशु प्रेमियों की अपील अस्वीकार

सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद, जिसमें स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया, कई पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और डॉग लवर्स ने अदालत से इस फैसले पर पुनर्विचार की अपील की। उन्होंने दलील दी कि यह आदेश पशु अधिकारों के खिलाफ है और आवारा कुत्तों को उनके परिचित परिवेश से हटाना अमानवीय कदम होगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस अपील को ठुकराते हुए स्पष्ट कहा कि “मानव जीवन और सुरक्षा सबसे पहले” है। न्यायाधीशों ने कहा कि हाल के महीनों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में तेज़ी आई है, जिससे बच्चे, मरीज और आम नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि सरकार और प्रशासन का दायित्व है कि वे नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करें।

पीठ ने कहा कि यह निर्णय किसी पशु विरोधी भावना से नहीं, बल्कि संतुलित दृष्टिकोण से लिया गया है — ताकि इंसान और पशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अदालत ने दोहराया कि सभी कुत्तों को उचित टीकाकरण और शेल्टर में रखा जाएगा, लेकिन मानव जीवन की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।

🏫 संस्थानों को ‘नोडल अधिकारी’ नियुक्त करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रत्येक संस्थान —
स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन — अपने परिसर की स्वच्छता और सुरक्षा के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें, जो यह सुनिश्चित करे कि कोई भी आवारा कुत्ता अंदर प्रवेश न करे।

“इन संस्थानों में डॉग बाइट की पुनरावृत्ति प्रशासनिक लापरवाही और प्रणालीगत विफलता को दर्शाती है,” अदालत ने कहा।

🏗️ सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सभी संस्थानों — स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन — को निर्देश दिया है कि वे अपने परिसर की स्वच्छता और सुरक्षा के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। यह अधिकारी सुनिश्चित करेगा कि कोई भी आवारा कुत्ता परिसर में प्रवेश न करे या वहां न ठहरे। अदालत ने कहा कि इन संस्थानों में बार-बार हो रही कुत्ते के काटने की घटनाएँ (dog bite incidents) प्रशासन की लापरवाही और सिस्टम की नाकामी को दर्शाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी परिसर की बाउंड्री, गेट और फेंसिंग की निगरानी करें, ताकि इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों। यह कदम नागरिकों, विशेष रूप से छात्रों, मरीजों और खेल खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

साथ ही, यह भी कहा गया कि

“अगर किसी संस्था या निकाय ने आदेशों की अवहेलना की, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सुओ मोटो कंटेम्प्ट (अवमानना) की कार्यवाही भी शामिल है।”

📜 राज्यों को रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ती डॉग बाइट घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इस आदेश के अनुपालन की स्थिति रिपोर्ट 8 सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें। अदालत ने कहा है कि हर राज्य यह सुनिश्चित करे कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, खेल परिसर और रेलवे स्टेशनों से सभी आवारा कुत्तों को हटाकर सुरक्षित शेल्टरों में स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, स्टरलाइजेशन और टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही या आदेशों की अनदेखी पाई गई, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह कदम नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

साथ ही, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि —

  • देशभर में कुत्तों के नसबंदी और टीकाकरण अभियान की स्थिति पर रिपोर्ट दे,

  • और डॉग बाइट रोकथाम के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करे।

🔍 सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य

यह आदेश अदालत के 22 अगस्त 2025 के निर्देशों का विस्तार है। कोर्ट ने कहा कि उद्देश्य है —

“नागरिकों के जीवन और सुरक्षा के मौलिक अधिकार की रक्षा करना, साथ ही पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार बनाए रखना।”

💬 निष्कर्ष

भारत में रैबीज और कुत्तों के काटने की घटनाएँ लंबे समय से एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बनी हुई हैं। हर साल हजारों लोग इस जानलेवा बीमारी के कारण अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला समय की मांग भी है और नागरिक सुरक्षा की दिशा में एक ठोस कदम भी।

इस आदेश से न केवल आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि इससे सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा का माहौल भी बहाल होगा। स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थानों में अब बच्चों, मरीजों और यात्रियों को डर के माहौल में नहीं रहना पड़ेगा। कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने इन निर्देशों का पालन नहीं किया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह फैसला यह भी दर्शाता है कि न्यायपालिका नागरिकों के “राइट टू लाइफ एंड सेफ्टी” (Right to Life and Safety) को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। साथ ही, यह आदेश पशु कल्याण के सिद्धांतों के अनुरूप भी है क्योंकि आवारा कुत्तों को मारने के बजाय सुरक्षित शेल्टरों में रखे जाने के निर्देश दिए गए हैं।

अब जिम्मेदारी राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों की है कि वे इन आदेशों को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ लागू करें, ताकि भारत के सार्वजनिक स्थल वास्तव में “सुरक्षित और मानवीय” बन सकें। 🐾


Post a Comment

0 Comments