7 लाख इनकम पर कोई टैक्स नहीं!
“जानें 2025 की नई टैक्स योजना”
हर वेतनभोगी व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपनी आय पर टैक्स कम से कम दे या बिल्कुल न दे। 2025 में आयकर कानूनों में हुए अहम बदलावों और केंद्र सरकार की हालिया घोषणाओं के चलते अब यह संभव हो पाया है कि ₹7 लाख तक की सालाना सैलरी पर कोई टैक्स न देना पड़े।
इसके साथ ही CBDT (Central Board of Direct Taxes) ने आकलन वर्ष 2025-26 (AY 2025-26) के लिए ITR फाइलिंग की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दी है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि टैक्स कैसे बचाएं, कौन-कौन सी कटौतियाँ लें, और दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में से किसे चुनना बेहतर होगा।
CBDT की घोषणा: 2025 में ITR फाइलिंग की बढ़ी हुई तिथि
CBDT ने करदाताओं को राहत देते हुए ITR दाखिल करने की समयसीमा को 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 कर दिया है।
यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
अधिक समय मिलेगा दस्तावेज़ों को सही से तैयार करने के लिए
टैक्स सेविंग प्लानिंग के लिए बेहतर अवसर
टेक्निकल गड़बड़ियों से बचने का समय
याद रखें: समयसीमा से पहले ITR फाइल करना न सिर्फ एक कानूनी जिम्मेदारी है, बल्कि यह आपके लोन, वीज़ा, क्रेडिट स्कोर आदि में भी मदद करता है।
क्या वास्तव में 7 लाख पर टैक्स जीरो हो सकता है?
हां! दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में यह संभव है — लेकिन अलग-अलग तरीकों से।
नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था: समझें अंतर
पुरानी टैक्स व्यवस्था में 7 लाख पर जीरो टैक्स कैसे दें?
मान लीजिए आपकी सालाना सैलरी ₹7,00,000 है। नीचे बताए गए डिडक्शन और छूटों का इस्तेमाल कर टैक्स शून्य किया जा सकता है:
1. स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) – 50,000
सभी वेतनभोगियों को स्वतः मिलती है
सैलरी से सीधा घटाई जाती है
2. धारा 80C – 1,50,000 तक की कटौती
इनमें निवेश करके कटौती पाएं:
PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड)
LIC प्रीमियम
EPF (कर्मचारी भविष्य निधि)
ELSS (टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड)
बच्चों की ट्यूशन फीस
3. धारा 80D – हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 25,000
स्वयं और परिवार के लिए
वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के लिए ₹50,000 तक अतिरिक्त
4. 80CCD(1B) – NPS में 50,000 अतिरिक्त छूट
अगर आप NPS (नेशनल पेंशन स्कीम) में निवेश करते हैं
5. धारा 87A – 12,500 तक की टैक्स छूट
अगर आपकी कर योग्य आय 5 लाख या उससे कम है, तो 87A के तहत टैक्स पूरी तरह माफ हो सकता है
उदाहरण से समझें टैक्स कैलकुलेशन
मान लीजिए आपकी सैलरी 7,00,000 है।
टैक्स कैलकुलेशन का फॉर्मूला
भारत में आयकर (Income Tax) की गणना आमतौर पर निम्नलिखित चरणों और फार्मूला के आधार पर की जाती है:
चरण 1: सकल आय (Gross Income) की गणना करें
Gross Income =
👉 वेतन (Salary)
किराया (अगर रेंटल इनकम है)
अन्य आय जैसे ब्याज, फ्रीलांस कमाई आदि
📌 यदि आप वेतनभोगी हैं, तो केवल आपकी सालाना सैलरी ही मुख्य घटक होगी।
चरण 2: अनुमत कटौतियों को घटाएं (Allowed Deductions)
यहाँ आप अपने निवेश और खर्चों के आधार पर कटौती का लाभ उठा सकते हैं, जैसे:
स्टैंडर्ड डिडक्शन – ₹50,000 (सभी वेतनभोगियों के लिए)
धारा 80C – ₹1,50,000 तक (LIC, PPF, EPF, ELSS, आदि)
धारा 80D – हेल्थ इंश्योरेंस पर ₹25,000 तक
धारा 80CCD(1B) – NPS में ₹50,000 तक
अन्य कटौतियाँ – जैसे हाउस लोन का ब्याज (80EEA), एजुकेशन लोन ब्याज (80E), आदि
📌 इन सभी कटौतियों को Gross Income से घटाने पर हमें मिलता है:
👉 Taxable Income (कर योग्य आय)
चरण 3: लागू टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स की गणना करें
भारत में दो टैक्स व्यवस्थाएं हैं:
पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime):
कटौतियाँ और छूट लागू होती हैं
✅ यदि आपकी Taxable Income ₹5 लाख या उससे कम है, तो धारा 87A के तहत ₹12,500 की छूट मिलने से आपका टैक्स शून्य (Zero) हो जाएगा।
नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) – 2025 के अनुसार:
🟢 नई व्यवस्था में कोई कटौतियाँ नहीं मिलतीं, लेकिन 7 लाख तक की आय पर धारा 87A के तहत टैक्स पूरी तरह माफ है।
4: टैक्स रिबेट घटाएं (Rebate under Section 87A)
यदि आपकी कर योग्य आय:
पुरानी व्यवस्था में ₹5 लाख तक है या
नई व्यवस्था में ₹7 लाख तक है,
तो आप ₹12,500 की टैक्स रिबेट के पात्र हैं।
👉 Rebate के बाद आपकी अंतिम टैक्स देनदारी = ₹0 हो सकती है।
चरण 5: सेस और सरचार्ज जोड़ें
आयकर की गणना के बाद, कुल टैक्स पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस (CESS) जोड़ा जाता है।
यदि आपकी आय बहुत अधिक (₹50 लाख+) है, तो सरचार्ज भी लग सकता है, लेकिन ₹7 लाख की आय पर नहीं।
अंतिम टैक्स कैलकुलेशन फॉर्मूला:
Gross Income – Allowable Deductions = Taxable IncomeIncome Tax = (Taxable Income × Slab Rate) – Rebate (u/s 87A) + 4% Cess
Taxable Income = Gross Salary – Deductions
Income Tax = (Taxable Income × Applicable Tax Rate) – Section 87A Rebate
IRS टैक्स सीजन (अमेरिका) में क्या चल रहा है?
United States Internal Revenue Service (IRS) ने 27 जनवरी 2025 से टैक्स सीजन शुरू किया है।
जिन करदाताओं ने जनवरी के अंत में रिटर्न फाइल किया, उन्हें फरवरी के मध्य तक रिफंड मिल चुका है।
भारत और अमेरिका दोनों ही टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे हैं।
ITR फाइल करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
सही फॉर्म का चुनाव करें — ITR-1, ITR-2 आदि
फॉर्म 16 और अन्य दस्तावेज़ तैयार रखें
समय से पहले फाइल करें — अब अंतिम तिथि 15 सितंबर 2025 है
टैक्स क्रेडिट (TDS) की जानकारी फॉर्म 26AS से मिलाएं
फॉर्म को वेरीफाई करना न भूलें (e-verification)
निष्कर्ष: स्मार्ट टैक्स प्लानिंग से बचाएं टैक्स
साल 2025 करदाताओं के लिए खास है।
सरल टैक्स व्यवस्था, अधिक डिजिटल सुविधाएं और लचीली समयसीमा ने इसे सहज बना दिया है।
यदि आप समय रहते सही निवेश करें, और पुरानी टैक्स व्यवस्था में कटौतियों का फायदा लें, तो ₹7 लाख की आय पर टैक्स पूरी तरह शून्य हो सकता है।
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