केरल में सांप काटना सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व : उपचार और जागरूकता पर नया जोर
तिरुवनंतपुरम, 13 अक्टूबर 2025: केरल, जो पश्चिम बंगाल के बाद देश में जहरीले सांपों की विविधता के मामले में दूसरे स्थान पर है, ने सांप के काटने से होने वाली विषाक्तता (स्नेकबाइट एनवेनोमेशन) को सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व की बीमारी घोषित किया है। इसके तहत सभी अस्पतालों के लिए सांप के काटने के मामलों की अनिवार्य रूप से रिपोर्टिंग, एंटी-वेनम आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और उपचार प्रोटोकॉल को मानकीकृत करना अनिवार्य होगा। यह निर्णय केरल उच्च न्यायालय के हालिया निर्देश के बाद लिया गया, जिसमें राज्य सरकार को नवंबर 2024 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार दो महीने के भीतर सांप के काटने को एक अधिसूचित बीमारी बनाने का आदेश दिया गया।
न्यायालय का आदेश और पृष्ठभूमि
26 सितंबर 2025 को जारी यह आदेश 2019 में दायर दो याचिकाओं पर आधारित था, जो वायनाड के एक सरकारी स्कूल में कक्षा 5 की एक छात्रा की सांप के काटने से मृत्यु के बाद दायर की गई थीं। इस घटना ने राज्य में सांप के काटने से होने वाली मौतों और अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं पर ध्यान आकर्षित किया था। केरल के अलावा, कर्नाटक और तमिलनाडु ने भी सांप के काटने को अधिसूचित स्थिति के रूप में घोषित किया है।
केरल में सांप के काटने को केरल सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2023 की धारा 28(3) के तहत एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (Integrated Disease Surveillance Programme) में शामिल किया गया है, जिससे यह एक संरचित स्वास्थ्य प्राथमिकता बन गया है।
सांप के काटने का वार्षिक प्रभाव
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार, केरल में हर साल सरकारी अस्पतालों में सांप के काटने के 8,000 से 12,000 मामले भर्ती होते हैं, जिनमें से लगभग 3,000 मामले गंभीर होते हैं। वन विभाग के "स्नेक अवेयरनेस, रेस्क्यू एंड प्रोटेक्शन" (SARPA) ऐप के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच 334 लोगों की सांप के काटने से मृत्यु हुई, यानी औसतन प्रति वर्ष 110 मौतें। हालांकि, हाल के वर्षों में यह संख्या घटी है—2020 में 76, 2021 में 40 और 2022 में 42 मौतें दर्ज की गईं।
बेहतर समन्वय और चिकित्सा प्रतिक्रिया
सांप के काटने को अधिसूचित बीमारी घोषित करने से विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई और चिकित्सा प्रतिक्रिया तंत्र को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। अब नैदानिक प्रबंधन और रिपोर्टिंग राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) द्वारा 2022 में प्रकाशित सांप के काटने के प्रबंधन के लिए अद्यतन राष्ट्रीय दिशानिर्देशों का पालन करेगी।
केरल में सांपों का खतरा
केरल के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जहरीले सांपों से खतरा बना हुआ है। रसेल वाइपर, कोबरा, क्रेट और सॉ-स्केल्ड वाइपर के अलावा, पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले हंप-नोज्ड पिट वाइपर का जहर गंभीर गुर्दे की जटिलताओं और गैर-रिपोर्टेड मौतों से जुड़ा है। जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन्स ऑफ इंडिया में 2021 के एक अध्ययन में इसकी पुष्टि की गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रणनीति के साथ तालमेल
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2017 में सांप के काटने की विषाक्तता को उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Disease) के रूप में मान्यता दी थी और 2030 तक इससे होने वाली मौतों और अक्षमताओं को आधा करने का आह्वान किया था। केरल की नई अधिसूचना इस वैश्विक रणनीति के साथ राज्य की स्वास्थ्य नीति को संरेखित करती है।
SARPA पहल की भूमिका
केरल का SARPA मंच नागरिकों को प्रमाणित सांप बचावकर्ताओं से जोड़ता है, सत्यापित घटना डेटा रिकॉर्ड करता है और सुरक्षित प्राथमिक प्रतिक्रिया पर मार्गदर्शन प्रदान करता है। इस पहल में प्रशिक्षित सांप हैंडलर, आपातकालीन बचाव दल और अस्पताल अलर्ट सिस्टम शामिल हैं, जिन्हें हाल के वर्षों में मौतों की संख्या में कमी का श्रेय दिया जाता है।
निष्कर्ष
केरल का सांप के काटने को सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व की बीमारी घोषित करने का कदम इस गंभीर समस्या से निपटने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है। इस पहल के माध्यम से, राज्य सरकार न केवल सांप के काटने से होने वाली मौतों और जटिलताओं को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि बेहतर चिकित्सा प्रणाली, समय पर एंटी-वेनम की उपलब्धता और मानकीकृत उपचार प्रोटोकॉल के जरिए नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। SARPA जैसे नवाचार और जागरूकता कार्यक्रमों के साथ, केरल ने सांप के काटने से होने वाले खतरों को कम करने में प्रभावी कदम उठाए हैं। यह कदम न केवल स्थानीय स्तर पर जीवन रक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2030 तक सांप के काटने से होने वाली मौतों और अक्षमताओं को आधा करने के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। यह एक समग्र दृष्टिकोण है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और समुदाय की भागीदारी को एकजुट कर केरल को इस चुनौती से निपटने में अग्रणी बनाता है।
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