SCO शिखर सम्मेलन 2025: पीएम मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश

 

SCO शिखर सम्मेलन 2025: पीएम मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश

चीन के तियानजिन में आयोजित 25वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद न केवल किसी एक देश की समस्या है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती है और कोई भी देश इससे खुद को सुरक्षित नहीं मान सकता। पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंडों को पूरी तरह अस्वीकार किया और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाने की बात कही।


उन्होंने कहा, “भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है। हाल ही में, हमने पहलगाम में आतंकवाद का सबसे घिनौना रूप देखा। ऐसे समय में उन सभी मित्र देशों का आभार, जिन्होंने भारत के साथ खड़े रहकर इसका विरोध किया।” पीएम मोदी ने अल-कायदा और उसके सहयोगी आतंकी संगठनों के खिलाफ भारत की सक्रिय भूमिका और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ आवाज उठाने को भी रेखांकित किया।


SCO की भूमिका और भारत का योगदान

SCO की स्थापना 2001 में हुई थी, जिसमें शुरुआत में केवल छह देश शामिल थे, लेकिन अब इसमें 10 सदस्य देश हैं जिनमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद तथा उग्रवाद के खिलाफ मिलकर काम करना है।

भारत का SCO में योगदान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में है। भारत SCO के सदस्य बनने के बाद से सुरक्षा के मोर्चे पर आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख को बढ़ावा दे रहा है। भारत ने अल-कायदा और उसके सहयोगी संगठनों के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई है और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई है।

आर्थिक दृष्टि से, SCO दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा हिस्सा रखते हैं। SCO देशों की संयुक्त GDP 24.4 ट्रिलियन डॉलर है, जिसमें भारत का योगदान लगभग 3.56 ट्रिलियन डॉलर है। भारत इस संगठन के माध्यम से मध्य एशिया और अफगानिस्तान के साथ बेहतर व्यापार और कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए पहल कर रहा है, जैसे कि चाबहार पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर।

सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी भारत ने SCO में 'सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम' स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे सदस्यों के बीच सभ्यता, संस्कृति, और परंपराओं का आदान-प्रदान होगा, जो क्षेत्रीय सहयोग और समझ को बढ़ावा देगा।

इस प्रकार, SCO के माध्यम से भारत न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, बल्कि आर्थिक विकास, सांस्कृतिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को भी प्रोत्साहित कर रहा है। भारत की यह भागीदारी उसकी वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूत करती है और क्षेत्रीय एवं वैश्विक राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।


पहलगाम हमले पर SCO का संयुक्त बयान

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की संयुक्त रूप से कड़ी निंदा की गई। SCO के सदस्य देशों ने इस हमले को पूरी मानवता के खिलाफ एक गंभीर चुनौती बताया और इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। तियानजिन में जारी किए गए संयुक्त घोषणापत्र में सदस्य देशों ने उन सभी आतंकवादियों, हमले के साजिशकर्ताओं और उनके समर्थन करने वालों को न्याय के कटघरे में लाने की विशेष मांग की गई।

घोषणापत्र में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के सभी रूपों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद के हर रूप से मिलकर लड़ें और इसके खिलाफ एकजुट हों।


सदस्य देशों ने मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सहानुभूति भी प्रकट की। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि आतंकवादी, अलगाववादी और उग्रवादी समूहों द्वारा निजी स्वार्थों के लिए किए जाने वाले प्रयोग और योजनाएं पूरी तरह खारिज की जानी चाहिए। इस संयुक्त बयान से यह साफ हो गया कि SCO आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

यह बयान न केवल आतंकवाद के खिलाफ SCO देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि भारत के उस कड़े रुख को भी समर्थन देता है, जो पीएम मोदी ने शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंडों को पूरी तरह से अस्वीकार करते हुए अपनाया।


सभ्यता संवाद मंच की स्थापना का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा, जिसे 'सभ्यता संवाद मंच' (Civilisation Dialogue Forum) कहा गया। इस मंच का उद्देश्य SCO के सदस्य देशों के बीच गहरे और सार्थक सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह मंच प्राचीन सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं, कला, साहित्य और ज्ञान को वैश्विक स्तर पर साझा करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा।

इस पहल के माध्यम से सदस्य देश न केवल अपने पारंपरिक संबंधों को मजबूत कर सकेंगे, बल्कि आपसी समझ, सम्मान और सौहार्द्र को भी बढ़ावा मिलेगा। मोदी ने यह बात भी साझा की कि इस मंच द्वारा युवा, विद्वान, कलाकार और सांस्कृतिक प्रतिनिधि अपने-अपने देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित कर सकेंगे, जिससे SCO एक समावेशी और बहुसांस्कृतिक संगठन के रूप में उभर कर सामने आएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आज के समय में लोगों के बीच संपर्क और संवाद से ही स्थिरता और विकास संभव है, और SCO इस दिशा में एक सशक्त मंच बन सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संपर्क के प्रयासों में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना अनिवार्य है, तभी विश्वास और सहयोग मजबूत होगा।


इस तरह, संसद में 'सभ्यता संवाद मंच' का प्रस्ताव SCO के सहयोग को केवल राजनीतिक और आर्थिक स्तर तक सीमित न रखते हुए, इसे सांस्कृतिक और मानवीय स्तर तक विस्तारित करने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह पहल SCO को व्यापक सामाजिक-सभ्यात्मक संगठन बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी और सदस्य देशों के बीच लोगों के बीच गहरा मेल जोल संभव बनाएगी।


निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने SCO शिखर सम्मेलन के भाषण में आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा और निर्णायक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद न केवल किसी एक देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि ये पूरी मानवता के लिए साझा और गंभीर चुनौती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस वैश्विक समस्या पर किसी भी तरह के दोहरे मानदंड को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की अपील की और भारत की आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ आवाज को सराहा।

इस भाषण में उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अल काइदा और उसके सहयोगी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सक्रिय कदम उठाए हैं और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक साझा संघर्ष में नेतृत्व की भूमिका निभाई है। मोदी ने पुलवामा हमले का उल्लेख करते हुए, आतंकवाद के इस घिनौने स्वरूप की निंदा की और विश्व से आतंकवादियों के असंबंधित समर्थन को समाप्त करने की बात कही।

प्रधानमंत्री मोदी ने SCO को सुरक्षा (Security), कनेक्टिविटी (Connectivity), और अवसर (Opportunity) के मंच के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने, और सांस्कृतिक एवं सभ्यात्मक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए SCO की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने चाबहार पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे परियोजनाओं की जानकारी दी, जिनसे मध्य एशिया और अफगानिस्तान से बेहतर जोड़ स्थापित होगा।


साथ ही, मोदी ने 'सभ्यता संवाद मंच' की स्थापना का प्रस्ताव रखा, जिससे SCO सदस्य देशों के बीच प्राचीन सभ्यताओं, संस्कृति, परंपराओं और साहित्य के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलेगा। यह पहल क्षेत्रीय स्थिरता, विश्वसनीयता और विकास में सांस्कृतिक सहयोग का एक नया आयाम स्थापित करेगी।

मोदी ने यह स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी बढ़ती भूमिका के साथ सुरक्षा संस्थाओं में भी सक्रिय भागीदार है और आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एकता को मजबूती देना उसकी प्राथमिकता है। यह संदेश पाकिस्तान सहित उन सभी देशों के लिए स्पष्ट था, जो आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानदंड अपनाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह भाषण न केवल भारत की सशक्त विदेश नीति को दर्शाता है, बल्कि SCO के माध्यम से क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा, और विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूती से प्रस्तुत करता है।

इस प्रकार, पीएम मोदी का यह भाषण SCO के बहुपक्षीय मंच पर भारत के कूटनीतिक दबदबे को दर्शाता है और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक संघर्ष में भारत की भूमिका को एक नई दिशा देता है।


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